Swami Ramdev at Deoband in Saharanpur, Uttar Pradesh | November 2009
परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने इस विडियो में सहारनपुर यूपी के बारे में कुछ बताये हैं मैं जिनकी बहुत दिल से इज्जत करता हूँ और बहुत अरसे से मेरी तमन्ना थी की जहाँ देवो की बन्दगी की जाती हैं खुदा की जहाँ बन्दगी की जाती हैं ऐसे इस भगवान की धरती पर मुझे आमंत्रित किया हैं मैं प्रथम भाई महमूद मदनी साहब का मौलाना साहब का हृदय से शुक्र गुजार हूँ की आप सब ने मझे ईश्वर का भगवान अल्लाह का खुदा के बंदो का दर्शन करने का मौका दिया मैं मौलानाकारी उस्मान साहब का भी बहुत शुक्र गुजार हूँ उनको हृदय से धन्यवाद देता हूँ और मेरे आगे पीछे जो महान आत्माएं हैं उन सबके साथ इस दोपहर की धुप में आपकी धैर्य को हिम्मत को मैं सलाम करता हूँ सभी मेरे मुश्लिम भाईयों को अस्लाम वालेकुम और मेरा आपको प्रणाम हैं नमस्ते हैं और इसलिये की मैं आपको इस टोपी से वस्त्रो से ढका हुआ कोई मुशलमान नही मैं आपके भीतर उस खुदा के नूर को देखता हूँ और भारत मैं के तकदीर और भविष्य को देखता हूँ आप एक सामान्य इंसान नही हैं भगवान ने उस अल्लाह ने एक विशेष शक्ति देकर अल्लाह खुदा ने भाषाओँ में चाहे उसको हमने भगवान कहाँ ईश्वर कहाँ परमात्मा कहाँ अल्लाह कहाँ खुदा कहाँ हमने इबादत भी अलग अलग भाषाओं में की हो संस्कृत में उर्दू में अरबी फारसी में हमने कही मंत्र बोलकर इबादत की हो तो कही हमने वो परमात्मा वो खुदा जो सारी दुनिया का मालिक हैं हमने चाहे उसे अलग भाषा में अलग अलग नाम दिए हो खुदा का नाम हिंदी में अंग्रेजी में संस्कृत में अलग अलग नाम हो सकते हैं लेकिन वो परमात्मा अलग नही हो सकता और हम उस खुदा के बंदे भी एकथे एक हैं और एक रहेंगे भारत के प्रथम स्वतंत्र संग्राम से लेकर के बहादुर साह जफर का वो सफर बेगम हजरत मेहेल वक्त खां और अजीम मुल्ला से लेकर के राम प्रसाद बिस्मिल के हमसफर अस्फुक उल्लाह खां तक देश की आजादी से लेकर के और देश की हिफाजत की सफर में मैं एपीजी अबदुलकलाम का नाम लू तो वो हमारे गौरव हैं माने मुशालमानो ने इस देश की आजादी से लेकर के इस देश की हिफाजत को लेकर के इस देश की तरक्की में जो योगदान दिया हैं उसको ये वतन कभी भुला नही सकता और आज भी मुझसे को बात करता हैं और कहता हैं बाबा कहाँ जा रहे हो पहली बार इस देव बंध की धरती पर मिल रहा हूँ इस जलसे में मिल रहा हूँ मुझसे कहाँ बाबा वहां तो सारे टोपी वाले होंगे वहां आपको कोई खतरा तो नही होगा मैंने कहाँ वो मेरे भाई हैं इसलिए मुझे उनसे खतरा नही हो सकता क्योकि उनका और मेरा खून एक हैं ये खून रंग ही एक मात्र रंग नही हैं की लाल खून हैं आपके अंदर और मेरे अंदर इस खून मे एक और हमारे पूर्वजो का इतिहास हैं आपके और हमारे पूजा पाठ की पद्धतिया अलग हो सकती हैं लेकिन आपके और मेरे पूर्वज एक ही हैं इसलिये कभी नही भूल सकते तो आखिर भेद किस बात का जब योग बात की आती हैं तो मैं हमारे इन सब महापुरुषों का मौलानाओं का जिन्होंने कहाँ की योग जो हैं धर्म से मजह्प से परे हैं और बात करू और योग की बात ना करू तो नाइंसाफी होगी मैं लोगो को साँस लेना सिखाता हूँ आप नमाज पढ़ते हैं यदि कोई पांच बार नमाज पढ़ता हैं तो 96 बार सजदा करता हैं तो वो मंडूक आसन करता हैं और सर्सका आसन करता हैं तो क्या फर्क हैं इस बात पर और जहाँ तक योग का प्रश्न हैं माना हमारे शरीर में आठ मुख्य शक्ति के केंद्र हैं लेकिन हमको हमारी शरीर की एक एक कोशिका को ऑक्सीजन चाहिये और ऑक्सीजन कहाँ से मिलेगा साँस लम्बा भरने से मिलेगा अब हिन्दू ले मुशलमान ले इसाई ले साँस तो उपर से ले सकते हैं अब मान लीजिये किसी को साँस की बीमारी हैं और उसने योग किया तो वह बीमारी ठीक हो गयी तो उसमे मजहप कहाँ से आया मान लीजिये किसी का पेट मोटा हो गया और उसने कपालभाति कर लिया तो इससे हमारे पेट हल्के हो जायेंगे और आप सीखना चाहते हैं तो श्वास को एक बार भरो और एक बार छोड़ दो अगर हमारी लीवर की किडनी की हिफाजत करनी हैं तो वो हैं कपालभाति इसको दस पन्द्रह मिनट कर ले इसमें ना कोई ओम आता ना कोई अल्लाह आता हैं इसमें सिर्फ अपना शरीर ठीक हो जाता हैं मैंने देश में सैकड़ो शिविर किये हैं Visit us on Website:https://ift.tt/PCOEkQ; Blog:https://ift.tt/1gmbIcC Facebook: https://ift.tt/1fbUdC1 https://ift.tt/PCOGcF; https://ift.tt/1T4tIvJ https://ift.tt/1VVuHVI YouTube : https://www.youtube.com/user/TheBHARATSWABHIMAN Follow us on Twitter: https://twitter.com/bst_official https://twitter.com/yogrishiramdev
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परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने इस विडियो में सहारनपुर यूपी के बारे में कुछ बताये हैं मैं जिनकी बहुत दिल से इज्जत करता हूँ और बहुत अरसे से मेरी तमन्ना थी की जहाँ देवो की बन्दगी की जाती हैं खुदा की जहाँ बन्दगी की जाती हैं ऐसे इस भगवान की धरती पर मुझे आमंत्रित किया हैं मैं प्रथम भाई महमूद मदनी साहब का मौलाना साहब का हृदय से शुक्र गुजार हूँ की आप सब ने मझे ईश्वर का भगवान अल्लाह का खुदा के बंदो का दर्शन करने का मौका दिया मैं मौलानाकारी उस्मान साहब का भी बहुत शुक्र गुजार हूँ उनको हृदय से धन्यवाद देता हूँ और मेरे आगे पीछे जो महान आत्माएं हैं उन सबके साथ इस दोपहर की धुप में आपकी धैर्य को हिम्मत को मैं सलाम करता हूँ सभी मेरे मुश्लिम भाईयों को अस्लाम वालेकुम और मेरा आपको प्रणाम हैं नमस्ते हैं और इसलिये की मैं आपको इस टोपी से वस्त्रो से ढका हुआ कोई मुशलमान नही मैं आपके भीतर उस खुदा के नूर को देखता हूँ और भारत मैं के तकदीर और भविष्य को देखता हूँ आप एक सामान्य इंसान नही हैं भगवान ने उस अल्लाह ने एक विशेष शक्ति देकर अल्लाह खुदा ने भाषाओँ में चाहे उसको हमने भगवान कहाँ ईश्वर कहाँ परमात्मा कहाँ अल्लाह कहाँ खुदा कहाँ हमने इबादत भी अलग अलग भाषाओं में की हो संस्कृत में उर्दू में अरबी फारसी में हमने कही मंत्र बोलकर इबादत की हो तो कही हमने वो परमात्मा वो खुदा जो सारी दुनिया का मालिक हैं हमने चाहे उसे अलग भाषा में अलग अलग नाम दिए हो खुदा का नाम हिंदी में अंग्रेजी में संस्कृत में अलग अलग नाम हो सकते हैं लेकिन वो परमात्मा अलग नही हो सकता और हम उस खुदा के बंदे भी एकथे एक हैं और एक रहेंगे भारत के प्रथम स्वतंत्र संग्राम से लेकर के बहादुर साह जफर का वो सफर बेगम हजरत मेहेल वक्त खां और अजीम मुल्ला से लेकर के राम प्रसाद बिस्मिल के हमसफर अस्फुक उल्लाह खां तक देश की आजादी से लेकर के और देश की हिफाजत की सफर में मैं एपीजी अबदुलकलाम का नाम लू तो वो हमारे गौरव हैं माने मुशालमानो ने इस देश की आजादी से लेकर के इस देश की हिफाजत को लेकर के इस देश की तरक्की में जो योगदान दिया हैं उसको ये वतन कभी भुला नही सकता और आज भी मुझसे को बात करता हैं और कहता हैं बाबा कहाँ जा रहे हो पहली बार इस देव बंध की धरती पर मिल रहा हूँ इस जलसे में मिल रहा हूँ मुझसे कहाँ बाबा वहां तो सारे टोपी वाले होंगे वहां आपको कोई खतरा तो नही होगा मैंने कहाँ वो मेरे भाई हैं इसलिए मुझे उनसे खतरा नही हो सकता क्योकि उनका और मेरा खून एक हैं ये खून रंग ही एक मात्र रंग नही हैं की लाल खून हैं आपके अंदर और मेरे अंदर इस खून मे एक और हमारे पूर्वजो का इतिहास हैं आपके और हमारे पूजा पाठ की पद्धतिया अलग हो सकती हैं लेकिन आपके और मेरे पूर्वज एक ही हैं इसलिये कभी नही भूल सकते तो आखिर भेद किस बात का जब योग बात की आती हैं तो मैं हमारे इन सब महापुरुषों का मौलानाओं का जिन्होंने कहाँ की योग जो हैं धर्म से मजह्प से परे हैं और बात करू और योग की बात ना करू तो नाइंसाफी होगी मैं लोगो को साँस लेना सिखाता हूँ आप नमाज पढ़ते हैं यदि कोई पांच बार नमाज पढ़ता हैं तो 96 बार सजदा करता हैं तो वो मंडूक आसन करता हैं और सर्सका आसन करता हैं तो क्या फर्क हैं इस बात पर और जहाँ तक योग का प्रश्न हैं माना हमारे शरीर में आठ मुख्य शक्ति के केंद्र हैं लेकिन हमको हमारी शरीर की एक एक कोशिका को ऑक्सीजन चाहिये और ऑक्सीजन कहाँ से मिलेगा साँस लम्बा भरने से मिलेगा अब हिन्दू ले मुशलमान ले इसाई ले साँस तो उपर से ले सकते हैं अब मान लीजिये किसी को साँस की बीमारी हैं और उसने योग किया तो वह बीमारी ठीक हो गयी तो उसमे मजहप कहाँ से आया मान लीजिये किसी का पेट मोटा हो गया और उसने कपालभाति कर लिया तो इससे हमारे पेट हल्के हो जायेंगे और आप सीखना चाहते हैं तो श्वास को एक बार भरो और एक बार छोड़ दो अगर हमारी लीवर की किडनी की हिफाजत करनी हैं तो वो हैं कपालभाति इसको दस पन्द्रह मिनट कर ले इसमें ना कोई ओम आता ना कोई अल्लाह आता हैं इसमें सिर्फ अपना शरीर ठीक हो जाता हैं मैंने देश में सैकड़ो शिविर किये हैं Visit us on Website:https://ift.tt/PCOEkQ; Blog:https://ift.tt/1gmbIcC Facebook: https://ift.tt/1fbUdC1 https://ift.tt/PCOGcF; https://ift.tt/1T4tIvJ https://ift.tt/1VVuHVI YouTube : https://www.youtube.com/user/TheBHARATSWABHIMAN Follow us on Twitter: https://twitter.com/bst_official https://twitter.com/yogrishiramdev
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